विशेष - ये जिन्दगी के मेले दुनिया में कम न होंगे - शकील बदायूंनी
ये जिन्दगी के मेले दुनिया में कम न होंगे
शकील बदायूंनी की पुण्यतिथि पर विशेष
उत्तर प्रदेश के बदायूं कस्बे में तीन अगस्त 1916 को जन्में शकील बदायूंनी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय से स्नातक पास करने के बाद वर्ष 1942 में दिल्ली में आपूर्ति अधिकारी के रूप में अपने कैरियर का आगाज किया।
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उन्होंने सुप्रसिद्ध संगीतकार रवि के लिए घराना, चौदहवीं का चाँद व दो बदन फिल्म के गीत लिखे। हेमंत कुमार की संगीतबद्ध फिल्म बीस साल बाद व साहिब बीवी और गुलाम फिल्म के सदाबहार नग्मे भी शकील साहब ने लिखे।
शकील बदायूंनी को अपने गीतों के लिए तीन बार फिल्म फेयर अवॉर्ड से नवाजा गया। इनमें वर्ष 1960 में प्रदर्शित फिल्म ‘चौदहवीं का चांद’ के ‘चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो’, वर्ष 1961में ‘घराना’ के गीत हुस्न वाले तेरा जवाब नहीं और 1962 में बीस साल बाद के गीत ‘कहीं दीप जले कहीं दिल’ के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
शकील बदायूंनी को अपने गीतों के लिए तीन बार फिल्म फेयर अवॉर्ड से नवाजा गया। इनमें वर्ष 1960 में प्रदर्शित फिल्म ‘चौदहवीं का चांद’ के ‘चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो’, वर्ष 1961में ‘घराना’ के गीत हुस्न वाले तेरा जवाब नहीं और 1962 में बीस साल बाद के गीत ‘कहीं दीप जले कहीं दिल’ के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
आज इस अज़ीम शायर व गीतकार की पुण्यतिथि पर उन्हें हार्दिक श्रद्राँजलि एवं शत-शत नमन।
श्रध्दान्जली
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